रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जल्दी ही बाजार में मिलेगा तेंदू फल का जूस

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रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जल्दी ही बाजार में मिलेगा तेंदू फल का जूस

M Y Team दिनांक १२ जुलाई २०२१

छत्तीसगढ़ के वनांचल में पाए जाने वाले तेंदू फल से अब आदिवासियों की आमदनी बढ़ने के साथ-साथ और आम जन की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वानिकी विभाग ने एंटी आक्सीडेंट के गुण से भरपूर तेंदू फल पर ढाई साल तक अनुसंधान के आधार पर प्रचुर मात्रा में खनिज और पोषक तत्व वाला जूस तैयार किया। तेंदू में विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम, और फास्फोरस जैसे खनिज तत्व पाए जाते हैं।

अभी तक केवल तेंदू पत्ते का ही कारोबार होता रहा है और जिससे छत्तीसगढ़ सरकार को प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ की आमदनी होती है। अब इसके फल से बनने वाले जूस से भी आदिवासियों की कमाई होगी। अभी सुखे हुए तेंदू फल का उपयोग औषधियों में ही होता है। यह दस्त, बुखार, मुख व गले के रोग, जोड़ों के दर्द और घाव को जल्दी सुखाने में लाभकारी है।

आमतौर पर इस फल को जंगली जानवर खा जाते हैं। तेंदू फल के फूड प्रोसेसिंग के लिए कृषि विवि के प्रोफेसरों ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल से पहल करने की अपील की है। राज्यपाल अनुसईया उईके ने भरोसा दिया है कि भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास परिसंघ (ट्राइफेड) भी इसके जूस को देशभर में पहुंचाने की मदद करेगा। शोधकर्ताओं ने तेंदू जूस पेटेंट के लिए भी आवेदन किया है।

बाजार नहीं मिलने से सड़ जाते तेंदू फल

वनों से आदिवासी कुछ फल एकत्र कर बाजार में बहुत ही कम कीमत पर बेच कर जीवनयापन करते हैं। अत्यधिक मात्रा में बाजार तक यह तेंदू फल नहीं पहुंचने से जंगल में यह फल सड़ कर नष्ट हो जाते हैं। इस पर गहन शोध कर इस फल से जूस निकालने की विधि खोज ली है। वहीं, इस उपलब्धि से कई जूस बनाने वाली इंडस्ट्रीज छत्तीसगढ़ में लगने की और रोजगार बढ़ने की संभावना है। इस योजना से बहुतायत लोगों को रोजगार के साथ आदिवासियों को आमदनी बढ़ाने का बेहतर रास्ता भी मिल जाएगा। एक जानकारी में यह भी बताया गया कि तेंदू जूस निर्माण के लिए फल प्रसंस्करण इकाइयों को यह तकनीक इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर हस्तांतरित करने की योजना पर कार्य करेंगे।

तेंदू फल मानवीय जीवन को काफी लाभ पहुंचा सकता है

तेंदू फल का रासायनिक विश्लेषण करने पर पोषक तत्व जो मानवीय जीवन को काफी लाभ पहुंचा सकता है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने व स्वाद बिल्कुल तेंदू जैसा है और सुगंध भी। इस प्रकार का शोध लघुवनोपज पर संबंधित उत्पाद बाजार में लाकर रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देंगे। वनवासियों की आय में वृद्धि करने की आवश्यकता है।

राज्यपाल को दी गई है पूरी जानकारी

वानिकी वैज्ञानिक डा. आरके प्रजापति और पीएचडी शोध के लिए छात्रा चंद्रशिखा पटेल ने राज्यपाल अनुसुईया उइके से मुलाकात करके तेंदू जूस के बारे में जानकारी दी है। राज्यपाल ने कहा कि आदिवासियों की आय हम कैसे बढ़ाएं इस पर यह शोध बहुत ही सराहनीय पहल है। लघु वनोपज से हम आदिवासियों की आय में वृद्धी कर सकते हैं। इस पर अनुसंधान के लिए राज्य शासन को धन मुहैया करना चाहिए। इस अनुसंधान से सकारात्मक परिणाम आएंगे।

सौजन्य-नई दुनिया

https://www.naidunia.com/chhattisgarh/raipur-tendu-fruit-juice-will-soon-be-available-in-the-market-to-increase-immunity-6966818

 

 

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